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बेजान सी वो जान

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आज सवेरे कुछ पुराने अख़बारो को यूँही पलटते वक्त,

मेरी नजर एक पंक्ति पर आके थम गयी ।

“देश की राजधानी मे आठ माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म !”

क्या सच में 8 महीने !!!??

मेरे एक हाथ जितनी ही होगी न वो??, या शायद उसे भी छोटी

हा शायद उसकी ही गलती होगी, उसने जरूर छोटे कपड़े पहने होगे,

या फिर उसने अपना अंग प्रदर्शन किया होगा !!!

है न ?????

आपने कभी सोचा उस मासूम के बारे में???

क्या मैं?, अरे नहीं मैने भी नहीं सोचा , मैं भी आपलोग की तरह निर्जीव हूँ एकदम निर्जीव , जिसकी भूख अब सीर्फ ‘दौलत ‘ है, और प्यास सीर्फ ‘ वासना ‘ हैं !

हा पर वो मासूम !!!!

जिसे सीर्फ 8 महीने ही हुए थे इस खुबसुरत दुनियां में आये, और अचानक उसका सामना एक ऐसे इसांन से होता है

माफी चाहूंगा इंसान नहीं , इंसान तो नहीं हो सकता वो

 

अगर आज आप मुझसे पुछेगे की मै कौन हूँ?
तो मेंरा जवाब यही होगा की मै देश का वह युवा हु ,
जो अपनी काम वासना की तृप्ती के लिए
किसी भी परायी स्त्री को खाने की चेष्टा रखता है।

# गुरु

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